प्रेगनेंसी में चुकंदर कब खाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:26

लाल रंग का दिखने वाला चुकंदर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। वहीं, जब गर्भावस्था की बात आती है, तो इसे लेकर सवाल खड़ा हो सकता है कि इसे गर्भवती के आहार में शामिल किया जाना चाहिए या नहीं। यह सवाल लाजमी भी है, क्योंकि गर्भावस्था में खानपान का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। यही वजह है कि इस लेख में हम बता रहे हैं कि प्रेगनेंसी में चुकंदर खाना सुरक्षित है या नहीं। अगर हां, तो कितनी मात्रा में इसे लिया जाना चाहिए? साथ ही गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन का सही समय कौन-सा है। ऐसे तमाम सवालों के जवाब स्टाइलक्रेज के इस लेख में मौजूद हैं। साथ ही हम इस लेख में गर्भावस्था में चुकंदर खाने के फायदे और नुकसान के बारे में भी बता रहे हैं।


क्या गर्भावस्था में चुकंदर और इसका रस लेना सुरक्षित है?
प्रेगनेंसी में चुकंदर खाने के फायदे – Benefits of Eating Beetroot in Pregnancy In Hindi
गर्भावस्था के आहार में चुकंदर को कैसे शामिल करें?
गर्भावस्था में चुकंदर खाने के नुकसान- Side Effects of Beetroot in Pregnancy In Hindi

क्या गर्भावस्था में चुकंदर और इसका रस लेना सुरक्षित है?

एक शोध के दौरान चुकंदर के रस को 97% महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित पाया गया है। इसमें मौजूद नाइट्रेट की वजह से इसे गर्भवतियों के लिए भी अच्छा माना गया है (1)। चुकंदर पेट के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के साथ ही कई तरह से गर्भवतियों को फायदा पहुंचा सकता है, जिसके बारे में हम लेख के अगले भाग में बता रहे हैं (2)। चुकंदर का सेवन करते समय इसकी मात्रा का खास ख्याल रखा जाना चाहिए। दरअसल, इसमें मौजूद नाइट्रेट गर्भवास्था में महिला और भ्रूण के विकास में मदद करने के साथ ही कुछ नुकसान भी पहुंचा सकता है (3)। प्रेगनेंसी में चुकंदर खाने के नुकसान के बारे में हम लेख में आगे विस्तार से बताएंगे। नुकसान से पहले गर्भावस्था में चुकंदर खाने के फायदे के बारे में हम बता रहे हैं।



लेख के अगले हिस्से में हम प्रेगनेंसी में चुकंदर खाने के फायदे के बारे में बता रहे हैं।
प्रेगनेंसी में चुकंदर खाने के फायदे –
पाठक इस बात का ध्यान रखें कि चुकंदर गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी समस्या का इलाज नहीं है। यह केवल नीचे बताई जा रहीं समस्याओं के लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है।
1. फोलिक एसिड और बच्चों का विकास

बीटरूट में भरपूर मात्रा में फोलिक एसिड पाया जाता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए जरूरी माना जाता है। चुकंदर में मौजूद यह फोलिक एसिड अजन्मे बच्चे को बर्थ डिफेक्ट से बचाने में मदद कर सकता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ केमिकल स्टडीज के मुताबिक फोलिक एसिड शरीर में नए सेल्स को बनाने में मदद करता है। साथ ही यह भ्रूण की रीढ़ की हड्डी और दिमाग के उचित विकास को भी सुनिश्चित करता है (2)।
2. रक्त को शुद्ध करे

आधुनिक जीवन शैली, जंक फूड, शराब, दूषित पानी, अनिद्रा और खराब रक्त परिसंचरण यानी ब्लड सर्कुलेशन रक्त को अशुद्ध करने का कारण बनते हैं। रक्त की अशुद्धी की वजह से एलर्जी, मुंहासे, चकत्ते, जोड़ों में दर्द और इम्यून सिस्टम की कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं (3)। इन समस्याओं से बचने के लिए रक्त का साफ होना जरूरी है, जो चुकंदर की मदद से किया जा सकता है (2)। एक शोध में यह भी जिक्र मिलता है कि चुकंदर में मौजूद नाइट्रेट प्लेसेंटा के रक्त प्रवाह में सुधार कर सकता है, जिससे कुछ हद तक रक्त को शुद्ध करने में मदद मिल सकती है (4)। यह रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने का काम कर सकता है (2)।
3. शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाए

चुकंदर में मौजूद आयरन शरीर में इस तत्व को बढ़ाने में मदद कर सकता है। देखा गया है कि गर्भवतियों को अक्सर आयरन की कमी की वजह से एनीमिया की समस्या का सामना करना पड़ता है। एनीमिया, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बाधित हो जाता है। एक अध्ययन के मुताबिक विकासशील देशों में करीब 52% गर्भवतियां इससे प्रभावित होती हैं। इसी वजह से माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाना चाहिए, जिसमें चुकंदर भी शामिल है (5)। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध ने स्पष्ट किया है कि पके हुए करीब 150g बीटरूट में 1.2mg आयरन की मात्रा होती है (6)। हालांकि, कच्चे चुकंदर में इसकी मात्रा थोड़ी कम होती है (7)। वहीं, अध्ययन से पता चलता है कि आयरन को अवशोषित करने के लिए विटामिन-सी भी जरूरी होता है, जो चुकंदर में भरपूर होता है (8)।

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